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"कर्मण्येवाधिकारस्ते मा फलेषु कदाचन। अर्थ: कर्म करने में ही तुम्हारा अधिकार है, फल की चिंता मत करो।"
— श्रीमद्भगवद्गीता
और देखेंअध्यात्म
"तद्विज्ञानार्थं स गुरुमेवाभिगच्छेत् । समित्पाणिः श्रोत्रियं ब्रह्मनिष्ठम् ॥ अर्थ: ज्ञान प्राप्त करने के लिए उसे गुरु के पास जाना चाहिए, जो समित्पाणि (सामग्री लेकर), श्रोत्रिय (वेदों का ज्ञाता) और ब्रह्मनिष्ठ (ब्रह्म में स्थिर) हो"
— मुण्डकोपनिषद
और देखेंदर्द
"दिल की गहराइयों में छुपी होती हैं दर्द की जड़ें, अर्थ: जो दिखता नहीं वही सबसे ज्यादा चोट पहुँचाता है।"
— मिर्ज़ा ग़ालिब
और देखेंएटीट्यूड
"स्वाभिमान से जीना सीखो, आत्मसम्मान से खड़े रहो, क्योंकि जो अपने आप की कीमत समझता है, वही दूसरों की कीमत समझ सकता है।"
— संत तुकाराम
और देखेंखुशी/मस्ती
"सुखमाया ही जीवन की राजधानी है, जहां से खुशियों की यात्रा प्रारंभ होती है।"
— संत कबीर दास
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शब्दों में छुपी रोशनी
रविवार, 1 मार्च
आज का विचार
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"विश्वास करो कि तुम कर सकते हो और तुम आधे रास्ते पर हो।"
— थियोडोर रूजवेल्ट
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