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"कर्मण्येवाधिकारस्ते मा फलेषु कदाचन। अर्थ: कर्म करने में ही तुम्हारा अधिकार है, फल की चिंता मत करो।"
— श्रीमद्भगवद्गीता
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"तद्विज्ञानार्थं स गुरुमेवाभिगच्छेत् । समित्पाणिः श्रोत्रियं ब्रह्मनिष्ठम् ॥ अर्थ: ज्ञान प्राप्त करने के लिए उसे गुरु के पास जाना चाहिए, जो समित्पाणि (सामग्री लेकर), श्रोत्रिय (वेदों का ज्ञाता) और ब्रह्मनिष्ठ (ब्रह्म में स्थिर) हो"
— मुण्डकोपनिषद
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"स्वयं पर विश्वास रखो, क्योंकि यदि आप अपने पर विश्वास नहीं रखेंगे, तो दूसरे भी नहीं रखेंगे। अर्थ: आत्मविश्वास ही सफलता की कुंजी है।"
— स्वामी विवेकानंद
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शब्दों में छुपी रोशनी
शुक्रवार, 20 फ़रवरी
आज का विचार
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"विश्वास करो कि तुम कर सकते हो और तुम आधे रास्ते पर हो।"
— थियोडोर रूजवेल्ट
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