श्रीमद्भगवद्गीता
Bhagavad Gita
A sacred Hindu scripture that explores the nature of duty, action, and spiritual growth.
11 विचार
श्रीमद्भगवद्गीता के विचार
"कर्मण्येवाधिकारस्ते मा फलेषु कदाचन। अर्थ: कर्म करने में ही तुम्हारा अधिकार है, फल की चिंता मत करो।"प्रेरणा
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"यदा यदा हि धर्मस्य ग्लानिर्भवति भारत। अभ्युत्थानं अधर्मस्य तदात्मानं सृजाम्यहम्। अर्थ: जब-जब धर्म की हानि होती है, और अधर्म की वृद्धि होती है, तब-तब मैं अपना अवतार लेता हूँ।"ज्ञान
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"कर्मण्येवाधिकारस्ते मा फलेषु कदाचन। अर्थ: कर्म करने में ही तुम्हारा अधिकार है, फल की चिंता मत करो।"प्रेरणा
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"यदा यदा हि धर्मस्य ग्लानिर्भवति भारत। अभ्युत्थानमधर्मस्य तदात्मानं सृजाम्यहम्। अर्थ: जब-जब धर्म की हानि होती है और अधर्म की वृद्धि होती है, तब-तब मैं अपने आप को प्रकट करता हूँ。"ज्ञान
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"कर्मण्येवाधिकारस्ते मा फलेषु कदाचन। अर्थ: कर्म करने में ही तुम्हारा अधिकार है, फल की चिंता मत करो।"ज्ञान
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"मन चंचल और कठिन है वश में करना, परन्तु अभ्यास से यह वश में हो जाता है।"अध्यात्म
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"यदा यदा हि धर्मस्य ग्लानिर्भवति भारत। अभ्युत्थानमधर्मस्य तदात्मानं सृजाम्यहम्।"अध्यात्म
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